प्रयागराज में आपको मिलेंगे लेटे हुए हनुमान जी। माना जाता है कि समर्थ गुरु रामदास जी ने इस स्थान पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की थी। यहां समीप ही राम जानकी मंदिर एवं हरि माधव मंदिर भी हैं जहां आपको आध्यात्मिक शांति का अनुभव होगा।
अक्षय वट का उल्लेख अनेक पौराणिक कथाओं और धर्म ग्रंथों में आता है। विदेशी तीर्थयात्री ह्वेनसांग ने भी इस वृक्ष के बारे में अपने वृत्तांत में उल्लेख किया है। यह वही स्थान है जहाँ प्रभु श्रीराम, माता जानकी एवं लक्ष्मण ने वनवास के दौरान विश्राम किया था।
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